त्रिवेणी क्या है?


जब से मेरी त्रिवेणियाँ महाराष्ट्र बोर्ड के 11वीं हिंदी सिलेबस में शामिल हुई हैं, पूरे महाराष्ट्र से न सिर्फ़ स्टूडेंट्स के बल्कि टीचर्स के फ़ोन, मैसेज और ईमेल आते हैं कि उन्हें कभी-कभी अर्थ समझने-समझाने में परेशानी होती है। सो मैंने ये सोचा कि अलग-अलग पोस्ट लिख कर सिलेबस में शामिल त्रिवेणियों को समझने-समझाने की कोशिश करूँगा। अगली पोस्ट में त्रिवेणी और अर्थ पर बात होगी। आज त्रिवेणी विधा के बारे में-

त्रिवेणी क्या है?

त्रिवेणी उर्दू-हिंदी साहित्य की एक विधा है, जिसकी शुरुआत मशहूर शायर-गीतकार गुलज़ार ने 1960 के दशक में की थी। त्रिवेणी में तीन पंक्तियाँ होती हैं और इसका कोई शीर्षक नहीं होता। पहली दो पंक्तियों में ग़ज़ल के शेरों की तरह ही कही जाने वाली बात पूरी हो जाती है। तीसरी पंक्ति उस कही गई बात के अर्थ को बदल देती है या उससे एक नया अर्थ जुड़ जाता है। त्रिवेणी विधा के सर्जक गुलज़ार के अनुसार, “त्रिवेणी नाम इसीलिए दिया था कि पहले दो मिसरे, गंगा-जमुना की तरह मिलते हैं और एक ख़्याल, एक शेर को मुकम्मल करते हैं लेकिन इन दो धाराओं के नीचे एक और नदी है– सरस्वती जो गुप्त है नज़र नहीं आती; त्रिवेणी का काम सरस्वती दिखाना है। तीसरा मिसरा (पंक्ति) कहीं पहले दो मिसरों में गुप्त है, छुपा हुआ है।” त्रिवेणी विधा जापानी काव्य विधा हाइकू की तरह लगती है लेकिन अपने व्याकरण की दृष्टि से यह हाइकू से बिल्कुल अलग है। दरअसल, हाइकू में तीन पंक्तियों में केवल 17 वर्णों में (क्रमानुसार 5+7+5 कुल मिलाकर) किसी ख़याल को प्रस्तुत करने की बाध्यता होती है और त्रिवेणी विधा में ग़ज़ल की बह्र (मीटर) का इस्तेमाल किया जाता है। ग़ज़ल बहुत सी बह्रों में कही जाती है। यहाँ तीन उदाहरण दिए गए हैं। जिनमें त्रिवेणी कही गई है।

उदाहरण-1

चाहे कितना भी हो घनघोर अंधेरा छाया आस रखना कि किसी रोज़ उजाला होगा

रात की कोख ही से सुब्ह जनम लेती है

बह्र- फ़ाइलातुन-फ़इलातुन-फ़इलातुन-फ़ेलुन गिनती- 2122-1122-1122-22

उदाहरण-2

क़र्ज़ लेकर उमर के लम्हों से बो दिए मैंने बीज हसरत के

पास थी कुछ ज़मीं ख़यालों की

बह्र- फ़ाइलातुन-मुफ़ाइलुन-फ़ेलुन गिनती- 2122-1212-22

उदाहरण-3

आँसू ख़ुशियाँ एक ही शय है नाम अलग हैं इनके पेड़ में जैसे बीज छुपा है बीज में पेड़ है जैसे

एक में जिसने दूजा देखा वो ही सच्चा ज्ञानी

बह्र- फ़ेलुन-फ़ेलुन-फ़ेलुन-फ़ेलुन-फ़ेलुन-फ़ेलुन-फ़ेलुन गिनती- 2222-2222-2222-22

नोट- फ़ेलुन को फ़एलुन, यानी 2 को 11 भी पढ़ा जाता है।

त्रिवेणी संग्रह साँस के सिक्के पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

#Triveni #Tripurari #MaharashtraBoard11thClassHindiSyllabus #Prerna #Gulzar

Featured Posts
Recent Posts
Archive
Search By Tags

 

CONNECT WITH US

  • Facebook
  • Instagram
  • YouTube
  • Twitter
  • Amazon - Grey Circle

Copyright © 2020   TRIPURARI                                                Designed and Maintained by Alok Sharma

  • Facebook - Grey Circle
  • Instagram - Grey Circle
  • YouTube - Grey Circle
  • Twitter - Grey Circle
  • Amazon - Grey Circle