त्रिवेणी और अर्थ : नौवीं किश्त


पिछली पोस्ट में मैंने आठवीं त्रिवेणी का अर्थ समझने-समझाने की कोशिश की। किसी भी तरह का सवाल पूछना हो, तो नीचे कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं। मैं अपने फ़ेसबुक पेज पर लाइव भी आता रहूँगा ताकि आप सीधे-सीधे सवाल पूछ सकते हैं। फ़िलहाल, आज हम नौवीं त्रिवेणी का अर्थ समझेंगे। पेश है नौवीं किश्त-

त्रिवेणी-9

अपनी आँखों में जब भी देखा है एक बच्चा सा ख़ुद को पाया है

कौन कहता है उम्र बढ़ती है?  

भाव-

हम ज़िंदगी में जो कुछ सीखते हैं, उसमें अपना अनुभव और दूसरों का अनुभव दोनों शामिल होता है। हम एक ख़ास तरह के माहौल में पैदा लेते हैं। बड़े होते हैं। हम रोज़ाना मुख़्तलिफ़ लोगों से मिलते हैं। मुख़्तलिफ़ जगहें घूमते हैं। किताबें पढ़ते हैं। फ़िल्म देखते हैं। इन सबका असर हमारे ज़ेहन पर होता है। धीरे-धीरे हम एक ख़ास तरह से सोचने लग जाते हैं। इस सोचने के ढंग में हमारे परिवार और समाज की सोच भी शामिल होती चली जाती है। फिर उन सारी बातों से मिलकर एक नई सोच बनती है। यही सोच एक इंसान की पर्सनालिटी बनाती है। ज़िंदगी भर हम सब उसी पर्सनालिटी के चारों तरफ़ घूमते हैं। हम कहीं भी जाएँ, हमारे व्यवहार से और हमारे बात करने क तरीक़े से वो पर्सनालिटी झलकती है। अगर आपके भीतर बच्चों सी मासूमियत है, अगर आपका दिल साफ़ है तो आपको हर चीज़ वैसी ही मासूम और साफ़ दिखाई देगी।

अर्थ-

ऊपर दी गई त्रिवेणी में कहा गया है कि हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ हादसे ऐसे होते हैं, जिनका असर कभी नहीं जाता। ख़ासकर तब जब वो हादसा बचपन में हुआ हो। चाहे वो हादसा सकारात्मक हो या नकारात्मक। आपके साथ किसी ने ख़राब व्यव्हार किया हो या आपसे किसी ने प्रेम भरी बातें की हों। दोनों ही स्थितियों में वो हादसे आपकी ज़िंदगी का हिस्सा बन जाते हैं। ये बात सच है कि उम्र के बढ़ने के साथ हमें बहुत से अनुभव हासिल होते हैं और पुराने अनुभवों के अर्थ भी खुलते रहते हैं लेकिन धोखा हो या प्यार, उसका पहला अनुभव कभी नहीं भूला जा सकता। नए समय में जब इंसानी रिश्ते इतनी तेज़ी से बदल रहे हैं, हम रोज़ ही परेशानी और ख़ुशी का समाना करते हैं। ऐसी बहुत ज़रूरी है अपने भीतर के बच्चे को ज़िंदा रखा जाए। क्यूँ कि आपके भीतर का मासूम बच्चा ही मुश्किलों की घड़ी में आपको इस बात का यक़ीन दिलाएगा कि दुनिया अब भी जीने के लायक है।

त्रिवेणी संग्रह साँस के सिक्के पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

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