हर एक पल है तेरी मेरी दास्ताँ


कुछ गीत ऐसे होते हैं जिन्हें लिखते हुए आप उस स्टेट ऑफ़ माइंड में होते हैं, जिसमें ज़िंदगी बिताई जा सकती है। अफ़सोस, ऐसा मुमकिन नहीं है। फ़िलहाल ये गाना सुनिए और अपने घर ही में रहिए ताकि आप ख़ुद को और पूरी इंसानियत को महफ़ूज़ रख सकें।

मुखड़ा-

कभी जो सोच लूँ तुझे ज़ेहन महक महक उठे कभी जो देख लूँ तुझे तो दिल दहक दहक उठे तू मेरी ज़िंदगी में इस तरह से मेरे यार है कि उम्र भर तुझी पे मेरी साँस भी निसार है कभी जो सोच लूँ तुझे ज़ेहन महक महक उठे

ऐ मेरी जाँ, मेरी जाँ हर एक पल है तेरी मेरी दास्ताँ

ऐ मेरी जाँ, मेरी जाँ हर एक पल है तेरी मेरी दास्ताँ

अंतरा-

कैसे कहूँ नीली उजली ये बातें कह दूँ लाख फिर भी कुछ तो बाक़ी ही रहें कैसे रहूँ तुझ बिन भीगी ये रातें गहरी नींद में भी जैसे जागी ही रहें चुपके चुपके जुड़ने लगे दिल के धागे धीमे धीमे कहने लगे तेरे आगे नज़र मिला पास आ तू ज़रा लम्हा ये न बीत जाए...

कभी जो सोच लूँ तुझे ज़ेहन महक महक उठे कभी जो देख लूँ तुझे तो दिल दहक दहक उठे तू मेरी ज़िंदगी में इस तरह से मेरे यार है कि उम्र भर तुझी पे मेरी साँस भी निसार है कभी जो सोच लूँ तुझे ज़ेहन महक महक उठे

ऐ मेरी जाँ, मेरी जाँ हर एक पल है तेरी मेरी दास्ताँ

आख़िरी हिस्सा-

मेरे नाम का पहला हर्फ़ मोहब्बत का आसमां है इसीलिए मेरी कहानी, कहानी नहीं दास्तां है

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