मुझ को दीवाली मनाने की इजाज़त दे दो

 

ये लगातार 20 वां बरस है, जब मैं दीपावली में अपने घर पर नहीं हूँ। वैसे ज़रूरी नहीं कि हर दीपावली एक जैसा हो। ख़ैर! मेरे ये चंद अशआर पिछले कई बरसों का हासिल हैं। आप बताएँ कि कौन सा शेर आपको अच्छा लग रहा है? या आप किस शेर क साथ सबसे ज़ियादा कनेक्ट करते हैं?

 

1.
 

किस की ख़ातिर मैं जलाऊँगा दिया इस दिल का
कौन आएगा मेरे सीने की वीरानी में

 

2.
 

ज़ेहन में जब भी दिवाली का ख़याल आया है
लम्स उस शोख़ के जल उट्ठे चराग़ों की तरह

 

3.
 

मेरे सीने पे रखो हाथ कि दिल रोशन हो
मुझ को दीवाली मनाने की इजाज़त दे दो

 

4.
 

महकती नींद से जब रात ख़ाली हो गई मेरी
तो आँखें जल उठीं यानी दिवाली हो गई मेरी

 

5.
 

मियाँ तुम बात करते हो बड़ी-छोटी दिवाली की
हम अपना दिल जला कर ये दिवाली रोज़ करते हैं

 

 

नोट: मन करे तो बिंदास शेयर कीजिए, मगर क्रेडिट के साथ 

 

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