What is the meaning of Tripurari?

 

अक्सर लोग मुझसे मेरे नाम का अर्थ पूछा करते हैं। मैंने सोचा क्यूँ न एक पोस्ट बना कर तफ़्सील से बताया जाए ताकि किसी संदेह की गुंजाइश बाक़ी न रहे। तो चलिए शुरू करते हैं...

 

त्रिपुरारि संस्कृत का शब्द एक है, जिसका संधि विच्छेद इस तरह होगा-

 

त्रि + पुर + अरि = त्रिपुरारि

 

त्रि = तीन

 

पुर = नगर

 

अरि = विरोधी, वैरी, स्वामी या जीतने वाला 

 

अर्थात् जो तीन नगरों का स्वामी है, उसे त्रिपुरारि कहा जाता है। अब ये तीन नगर कौन-कौन से हैं, उनके बारे में जानना भी दिलचस्प होगा। एक प्राचीन कथा के अनुसार, त्रिपुर नाम का एक राक्षस था जो तीन लोकों (आकाश, पाताल और पृथ्वी) का स्वामी था और जिसके प्रकोप से हर कोई परेशान हो गया। सबने भगवान शिव से प्रार्थना की, कि उस राक्षस को मार कर तीनों लोकों में शांति स्थापित की जाए। भगवान शिव ने उस त्रिपुर नाम के राक्षस को मार दिया। इसीलिए भगवान शिव को त्रिपुरारि कहा जाता है।

 

...लेकिन ये कहानी झूठ है। तो फिर सच क्या है?

 

बात तब की है, जिन दिनों काग़ज़ की ईजाद नहीं हुई थी और लोग 'ज्ञान' को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए कविता या कहानी का इस्तेमाल करते थे। कविता राइमिंग में होती थी ताकि याद करने में आसानी हो। इसीलिए दुनिया की सबसे पुरानी भाषा संस्कृत में जितनी भी किताबें लिखी गईं या कहानी कही गई, वो सब पद्य (पोएट्री) में है, गद्य (प्रोज) में नहीं। और अगर कहानी में रूप में कही गई तो उसे इतना बढ़ा-चढ़ा कर कहा गया कि इंंसान भूल ही न पाए। तो त्रिपुरारि शब्द और उसके अर्थ को ज़िंदा रखने और इसके सही अर्थ को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए त्रिपुर राक्षस और भगवान शिव वाली कहानी बुनी गई।

 

तो फिर त्रिपुरारि का सही और वास्तविक अर्थ क्या है?

 

त्रिपुरारि का शाब्दिक अर्थ है, तीन नगरों के स्वामी लेकिन ये तीन नगर हैं- लोभ (Greed), मोह (Temptation) और काम (Lust). यानी एक ऐसा व्यक्ति जिसने लोभ, मोह और काम को जीत लिया हो। जीतने का मतलब यहाँ मुक्त होने से है। लोभ, मोह और काम से मुक्त होने की वजह से ही भगवान शिव को त्रिपुरारि कहा जाता है। जहाँ तक मेरा सवाल है, तीसरा नगर/लोक जीतना अभी बाक़ी है।

 

नोट:

 

बहुत से लोग त्रिपुरारि को त्रिपुरारी भी लिखते हैं। ये दोनों ही शब्द सही हैं लेकिन इनका अर्थ अलग-अलग है। संस्कृत में ‘अरि’ का मतलब स्वामी होता है और ‘अरी’ संगिनी या पत्नी को कहते हैं।

 

त्रि + पुर + अरि = त्रिपुरारि अर्थात् भगवान शिव

 

त्रि + पुर + अरी = त्रिपुरारी अर्थात् त्रिपुर (नामक राक्षस) की संगिनी या /पत्नी

 

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