कुछ गीत ऐसे होते हैं जिन्हें लिखते हुए आप उस स्टेट ऑफ़ माइंड में होते हैं, जिसमें ज़िंदगी बिताई जा सकती है। अफ़सोस, ऐसा मुमकिन नहीं है। फ़िलहाल ये गाना सुनिए और अपने घर ही में रहिए ताकि आप ख़ुद को और पूरी इंसानियत को महफ़ूज़ रख सकें। 

मुखड़ा-
 

कभी जो सोच लूँ तुझे ज़ेहन महक...

एक लड़की के एहसासों को लिखना हमेशा मुश्किल होता है। मेरी कोशिश कितनी कामयाब हुई, ये आप ही बताइए। सुनिए ये गीत... 

मुखड़ा-

पल जो ये खो रहा 
इसे जी लूँ मैं जी लूँ ज़रा
है जो भी अनकहा
किसे कह दूँ मैं कह दूँ ज़रा 

धीमा धीमा सा था मेरा ये सफ़र
मैं अब नहीं रुकूँ
चाहे ले के जाए...

जुलाई 2016 का आख़िरी हफ़्ता था। एक रोज़ मैं अपने दोस्त/म्युज़िक कम्पोज़र ध्रुव के साथ स्टूडियो जा रहा था, जहाँ हमारे गाने ‘मैं हूँ बेफ़िकर’ की मिक्सिंग हो रही थी। अचानक ध्रुव को सारेगामा प्रोडक्शन हाउस से एक मीटींग के लिए कॉल आई। वहाँ जाने पर पता चला कि उसे सन्युक्त के लिए ट...

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